हॉस्पिटल वाले घर के सामने बहुत सी सब्जियां उगाई थी हम लोगों ने. पतली पतली ककडी खाना तो मुझे याद है. घर के बहार एक नल लगा रहता था, बस तोड़ो, धो और खा लो.
एक बार पापा गैस वाले गुब्बारे लाये थे, जो हमसे छूट गए तो किचेन की छत से जा लगे, पापा ने याद नहीं कैसे उतारे थे.
अंकित वहीं पैदा हुआ था, मुझे खूब याद है उसे डोलची में रख कर लाये थे, पीछे मम्मी रिक्शे पर लायी गयी थी, शायद उनकी तबियत खराब थी.
वहाँ हॉस्पिटल के कई स्टाफ आते थे लेकिन मुझे कोई याद नहीं, हाँ एक बटोई अंकल थे जो गोद में ले कर झुलाते थे. हालांकि उनकी भी शकल मुझे याद नहीं.
और हाँ वहाँ पापा एक बार प्लास्टिक के ८-१० डिब्बे लाये थे जो मुझे लगा मेरे खेलने के लिए थे, बाद में पता चला वो मसाले रखने के लिए आये थे...................( वो डिब्बे मम्मी अभी तक इस्तेमाल कर रही हैं...........करीब करीब ३१ - ३२ सालों से ..............धन्य हो)
Friday, November 6, 2009
अगर अपनी सबसे पुरानी बात याद करुँ तो मुझे अपना पैर टूटना याद है. हालांकि मैं बहुत छोटा था लेकिन फिर भी मुझे याद है थोडा थोडा. हम लोग तब निराला नगर में रहते थे. मेरा दौड़ना, गिरना और फिर प्लास्टर बंधे हुए पैर से पापा का मुझे चलाने की कोशिश करना. बस इतना ही..........
फिर कुछ यादें हॉस्पिटल वाले घर की हैं...........
फिर कुछ यादें हॉस्पिटल वाले घर की हैं...........
आज ०६ नवम्बर है. सन २००९. आज से ठीक १८ साल पहले ................................................................... ६ नवम्बर १९९१ को दिवाली के ठीक अगले दिन सुबह सुबह मैं, पापा और मामा के साथ एयर फोर्स स्टेशन कानपुर गया था. और वहीं से मेरी एयर फोर्स की लाइफ शुरू हुई थी.
हालांकि १८ साल हो गए हैं, लेकिन लगता है कल की बात है.
हालांकि १८ साल हो गए हैं, लेकिन लगता है कल की बात है.
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